छत्तीसगढ़
चिरमिरी । गोदरी पारा के संगत भवन में विश्व मानवांधिकार दिवस भव्य रूप से मनाया गया कार्यक्रम में शामिल हुए जिला हॉस्पिटल के लोक प्रिय सीएमओ डॉ राजेन्द्र रॉय सहित थाना प्रभारी चिरमिरी विजय सिंह।

चिरमिरी । गोदरी पारा के संगत भवन में विश्व मानवांधिकार दिवस भव्य रूप से मनाया गया
कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल हुए जिला हॉस्पिटल के लोक प्रिय सीएमओ डॉ राजेन्द्र रॉय सहित थाना प्रभारी चिरमिरी विजय सिंह।
उग्रसेन पाल
मानव अधिकार अधिनियम, 1993 के तहत
भारत में “मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993” (The Protection of Human Rights Act, 1993) की धारा 2 (घ) में ‘मानव अधिकार’ को इस प्रकार विश्व भर मैं लागू किया गया है जब जब मानव अधिकार का हनन होगा तब तब विश्व मानवाधिकार उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ेगा इसी को परिभाषित करते हुए।
“मानव अधिकार से जीवन, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा से संबंधित ऐसे अधिकार अभिप्रेत हैं जो संविधान द्वारा प्रत्याभूत किए गए हैं या अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निविष्ट और भारत में न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं।”
इस परिभाषा का सरल अर्थ (Key Takeaways)
यह परिभाषा मानवाधिकारों के तीन मुख्य स्रोतों को एक साथ जोड़ती है:
संविधान द्वारा प्रत्याभूत अधिकार (Rights Guaranteed by the Constitution):
इसका तात्पर्य भारतीय संविधान के भाग III में दिए गए मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) से है, जैसे जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21), समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14), और स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19)।
अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निहित अधिकार (Rights Embodied in International Covenants):
इसका अर्थ उन अधिकारों से है जो भारत द्वारा हस्ताक्षरित और पुष्टि किए गए अंतर्राष्ट्रीय समझौतों (जैसे सिविल और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदा – ICCPR, और आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदा – ICESCR) में दिए गए हैं।
भारत के न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय अधिकार (Enforceable by Courts in India):
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये अधिकार ऐसे होने चाहिए जिन्हें भारत की अदालतों के माध्यम से लागू (enforce) किया जा सके, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनका उल्लंघन होने पर कानूनी उपचार उपलब्ध हो।
संक्षेप में, यह अधिनियम जीवन, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा से जुड़े उन सभी अधिकारों को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है जो भारत के संविधान या अंतर्राष्ट्रीय संधियों में मान्यता प्राप्त हैं और अदालतों में लागू किए जा सकते हैं।
इसी तारतम्य मैं आज गोदरी पारा के संगत भवन मैं विश्व मानवाधिकार दिवस पर कार्यक्रम रखा गया था
जिसमें एमसीबी जिला चिरमिरी
विश्व मानवाधिकार दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार एसोसिएशन ने संगत भवन, गोदरीपारा में कार्यक्रम रखा गया था कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया इसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय विधि महासचिव एडवोकेट राकेश महौत ने की, जबकि संचालन एडवोकेट पुष्पा गुडकारी ने प्रभावशाली रूप से संभाला।
“मंच से अतिथियों ने मानव अधिकार, महिला सुरक्षा, कानून व्यवस्था और नागरिक कर्तव्यों पर विस्तृत चर्चा रखी।
थाना प्रभारी विजय सिंह का संदेश:
“चिरमिरी थाना प्रभारी विजय सिंह ने कहा— कानून सबके लिए समान है… नशा और हिंसा मानव अधिकारों के सबसे बड़े दुश्मन हैं। उन्होंने महिलाओं के कानूनी अधिकार और पॉक्सो, दहेज व घरेलू हिंसा जैसे कानूनों की जानकारी दी।”
स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेषज्ञों का वक्तव्य:
“सिविल सर्जन डॉ. राजेंद्र राय ने स्वास्थ्य को मानव अधिकार का पहला स्तंभ बताया।
वहीं आत्मानंद विद्यालय के उपाध्यक्ष डी. के. वर्मा ने शिक्षा को सबसे बड़ा अधिकार बताते हुए RTE कानून की जानकारी दी।”
अध्यक्षीय उद्बोधन:
“एडवोकेट राकेश महौत ने कहा— मानव अधिकार जन्म से प्राप्त प्राकृतिक अधिकार हैं… और हर नागरिक की सुरक्षा इन पर ही टिकी है।
महिलाओं की भागीदारी व नई सदस्यता:
“समारोह में बड़ी संख्या में महिलाएँ शामिल हुईं।
कई नए सदस्यों को मानव अधिकार रक्षा की शपथ दिलाते हुए संगठन को और मजबूत बनाया गया।”










