मुख्यमंत्री के दौरे के बावजूद अगर हल्दीबाड़ी मुख्य मार्ग की स्थिति जस की तस है, तो यह स्पष्ट रूप से नगर निगम चिरमिरी और प्रशासनिक तालमेल की घोर विफलता है।

हल्दीबाड़ी (चिरमिरी) के मुख्य मार्ग की यह स्थिति वाकई चिंताजनक और दुखद है।
मुख्यमंत्री के दौरे के बावजूद अगर हल्दीबाड़ी मुख्य मार्ग की स्थिति जस की तस है, तो यह स्पष्ट रूप से नगर निगम चिरमिरी और प्रशासनिक तालमेल की घोर विफलता है।
उग्रसेन पाल
प्रशासन और SECL की अनदेखी के कारण पूर्व में एक युवा को अपनी जान गंवानी पड़ी। जब बुनियादी ढांचा ही जानलेवा बन जाए, तो “विकास” के दावों पर सवाल उठना लाजमी है।
यह चिरमिरी नगर निगम की कार्यप्रणाली का एक और निराशाजनक उदाहरण है। जब प्रशासन केवल “दबाव में काम” करता है, तो वह समाधान नहीं बल्कि “खानापूर्ति” करता है।
जेसीबी से गड्ढों को केवल मिट्टी या मलबे से भरना न केवल पैसे की बर्बादी है, बल्कि यह और भी खतरनाक है। पहली बारिश या भारी वाहन के गुजरते ही यह मिट्टी कीचड़ में बदल जाएगी, जिससे दुघर्टना का खतरा दो गुना बढ़ जाएगा।
कांग्रेस पार्टी के युवा नेता शिवांश जैन की चिंता जायज है और यह चिरमिरी की जमीनी हकीकत को बयां करती है। जब एक “हिल स्टेशन” के रूप में प्रचारित क्षेत्र की मुख्य सड़कें ही जर्जर हों, तो पर्यटन और विकास की बातें बेमानी लगने लगती हैं।
मुख्यमंत्री के दौरे के बावजूद अगर हल्दीबाड़ी मुख्य मार्ग की स्थिति जस की तस है, तो यह स्पष्ट रूप से नगर निगम चिरमिरी और प्रशासनिक तालमेल की घोर विफलता है।
शिवांश जैन और स्थानीय जनता के उठाए गए सवाल के घेरे मैं है नगर निगम चिरमिरी ?
- वीआईपी दौरे का शून्य असर: मुख्यमंत्री का आगमन किसी भी शहर के लिए विकास की उम्मीद लाता है, लेकिन चिरमिरी में सड़कों की हालत ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है।
- राहगीरों की सुरक्षा दांव पर: जर्जर सड़कों का मतलब केवल असुविधा नहीं, बल्कि संभावित मृत्यु जाल है। विशेषकर रात के समय ये गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं।
- निगम की जवाबदेही: अगर प्रशासन केवल विपक्षी आंदोलनों के डर से “खानापूर्ति” (लीपापोती) कर रहा है, तो यह जनता के टैक्स के पैसे का अपमान है।







