छत्तीसगढ़

खड़गवां में ‘न्याय’ का तमाशा: गरीब बुजुर्ग के हक पर बुलडोजर या रसूखदारों को फायदा पहुँचाने की साजिश?

यह मामला गंभीर प्रशासनिक संवेदनशीलता और   संवेदनशीलता और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़ा करता है। एक तरफ शासन प्रशासन ‘न्याय’ की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ एमसीबी जिले के खड़गवां तहसील के ग्राम शिवपुर में एक बुजुर्ग महिला की पीड़ा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गहरा सवालिया निशान लगा रही है।
## **खड़गवां में ‘न्याय’ का तमाशा: गरीब बुजुर्ग के हक पर बुलडोजर या रसूखदारों को फायदा पहुँचाने की साजिश?**
**खड़गवां (एमसीबी):** जब रक्षक ही सवालों से भागने लगें, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला है। एमसीबी जिले के खड़गवां जनपद अंतर्गत ग्राम शिवपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ तहसील कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं।
### **सवालों पर चुप्पी और अधिकारियों का ‘पलायन’**
हाल ही में जब पटवारी और आरआई (RI) सहित तहसील के अन्य जिम्मेदार अधिकारी ग्राम शिवपुर में ‘कब्जा हटाने’ की कार्यवाही करने पहुंचे, तो वहां मौजूद मीडिया कर्मियों ने जब प्रक्रिया और नियमों को लेकर सवाल किए, तो अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। चुप्पी साधने के बाद, स्थिति यह बनी कि पटवारी सहित अन्य अधिकारी मौके से भागते नजर आए।
**बड़ा सवाल:** अगर कार्यवाही नियमतः और निष्पक्ष थी, तो जिम्मेदार अधिकारियों को मीडिया के कैमरों और सवालों से डर क्यों लगा? क्या प्रशासन के पास इस कार्यवाही का कोई ठोस आधार नहीं था?
### **3 साल का लंबा इंतजार और 15 डिसमिल का दर्द**
यह मामला बुजुर्ग महिला **मानमती** का है, जो अपनी मात्र **15 डिसमिल** जमीन के लिए पिछले **3 वर्षों** से तहसील कोर्ट और सरकारी दफ्तरों की धूल फाँक रही है। एक तरफ सरकार बुजुर्गों और गरीबों के लिए त्वरित न्याय की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ मानमती जैसी बुजुर्ग महिला को 3 साल तक चक्कर लगवाने के बाद अचानक उसकी जमीन को ‘कब्जा’ बताकर कार्यवाही करना, प्रशासन की मंशा पर शक पैदा करता है।
### **साजिश की बू: किसके इशारे पर हो रहा ‘खेल’?
ग्रामीणों और चर्चाओं के अनुसार, इस पूरी कार्यवाही के पीछे कुछ गहरे सवाल छिपे हैं:
 1. —गरीब बनाम रसूखदार:— क्या इस कार्यवाही के जरिए किसी दूसरे पक्ष (भू-माफिया या प्रभावशाली व्यक्ति) को लाभ पहुँचाने की कोशिश की जा रही है?
 2. **प्रशासनिक दबाव:** आखिर किसके इशारे पर एक बुजुर्ग महिला की जमीन को रातों-रात अवैध घोषित कर दिया गया?
 3. **न्याय में देरी:** जो फाइल 3 साल से दबी थी, वह अचानक बिना किसी संतोषजनक जवाब के ‘कब्जा हटाने’ की फाइल में कैसे तब्दील हो गई?
 **निष्कर्ष**
लोकतंत्र में प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह होता है। खड़गवां तहसील के अधिकारियों का इस तरह सवालों से भागना यह दर्शाता है कि ग्राम शिवपुर के इस मामले में पारदर्शिता की भारी कमी है। यदि मानमती की जमीन पर की गई कार्यवाही निष्पक्ष है, तो प्रशासन को सामने आकर बुजुर्ग महिला के 3 साल के संघर्ष और मीडिया के सवालों का जवाब देना चाहिए।
• क्या एमसीबी जिला प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही और बुजुर्ग महिला को न्याय दिलाएगा?

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