प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ का नतीजा: गोदरीपारा गुरुद्वारा कॉम्प्लेक्स में विशाल सूखा पेड़ बिजली के तारों पर गिरा, पूरा इलाका अंधेरे में डूबा

प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ का नतीजा: गोदरीपारा गुरुद्वारा कॉम्प्लेक्स में विशाल सूखा पेड़ बिजली के तारों पर गिरा, पूरा इलाका अंधेरे में डूबा
चिरमिरी। नगर पालिक निगम चिरमिरी और वन विभाग की घोर लापरवाही एक बार फिर आम जनता पर भारी पड़ गई है। चिरमिरी के व्यस्त रिहायशी इलाके गोदरीपारा स्थित गुरुद्वारा कॉम्प्लेक्स के पास एक विशालकाय सूखा पेड़ अचानक भरभरा कर हाई वोल्टेज बिजली के तारों पर जा गिरा। पेड़ गिरने से जोरदार धमाके के साथ पूरा गोदरीपारा क्षेत्र अंधकारमय हो गया है। गनीमत रही कि घटना के वक्त पेड़ की जद में आने से लोग बाल-बाल बच गए, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था।
दहशत का माहौल, लोगों में मची अफरा-तफरी
चश्मदीदों के मुताबिक, आज जब यह विशाल सूखा पेड़ अचानक धराशायी हुआ, तो वहां आसपास बैठे और गुजर रहे लोगों की जान पर बन आई। पेड़ गिरने की आवाज और बिजली के तारों में हुए शॉर्ट सर्किट के कारण मौके पर अचानक अफरा-तफरी और भगदड़ का माहौल निर्मित हो गया। स्थानीय लोगों में इस प्रशासनिक उदासीनता को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
पहले भी हुआ था मुआयना, लेकिन नहीं जागा प्रशासन
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि स्थानीय नागरिकों ने कुछ दिनों पहले ही इस सूखे पेड़ से होने वाले खतरे की शिकायत की थी। शिकायत के बाद:
- नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी,
- स्थानीय जनप्रतिनिधि, और
- चिरमिरी फॉरेस्ट (वन विभाग) की टीम ने संयुक्त रूप से मौके पर पहुंचकर बकायदा मुआयना (निरीक्षण) भी किया था।
इसके बावजूद, न तो सुरक्षा की दृष्टि से पेड़ को समय रहते कटवाने या छांटने का कोई ठोस कदम उठाया गया, और न ही जान-माल की सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम किए गए। अधिकारियों ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।
पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम और वन विभाग की यह लापरवाही नई नहीं है। कुछ महीने पहले भी निगम की इसी तरह की लापरवाही के कारण एक गरीब व्यक्ति की पेड़ गिरने (या पेड़ से जुड़ी दुर्घटना) से जान चली गई थी। उस दर्दनाक हादसे के बाद भी निगम प्रशासन या फॉरेस्ट के जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया और आज यह दूसरी बड़ी घटना घटित हो गई।
सवालों के घेरे में निगम और फॉरेस्ट विभाग
इस घटना ने सीधे तौर पर चिरमिरी नगर निगम और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जब जनता ने पहले ही खतरे से आगाह कर दिया था और खुद अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया था, तो फिर इस संभावित हादसे को टालने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा था?
फिलहाल, पूरे क्षेत्र की बिजली गुल है और खबर लिखे जाने तक मलबे को हटाने और बिजली बहाली की कवायद शुरू नहीं हो सकी थी। स्थानीय जनता अब लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।






